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Tuesday, 31 January 2017

गद्य संकलन

गद्य संकलन
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प्रिय मित्रों,
लोकोदय प्रकाशन, लखनऊ द्वारा सहयोग आधार पर हिंदी गद्य साहित्य का एक संकलन प्रकाशित किये जाने की योजना है जिसका विवरण निम्न प्रकार है-
1- पुस्तक ‘विधा-विविधा’ नाम से होगी जिसमें देश के चयनित 21 साहित्यकारों द्वारा गद्य साहित्य की विभिन्न विधाओं (जैसे कहानी, लघुकथा, रेखाचित्र, रिपोर्ताज, संस्मरण, लेख, निबंध, शोध आलेख, व्यंग्य, नाटक, आलोचना, विमर्श, अनुवाद, यात्रा वृतांत, एकांकी, गल्प, साक्षात्कार,पत्र लेखन आदि) में लिखी गई रचनाओं को एक बिलकुल नए कलेवर में प्रस्तुत किया जाएगा।
2-मंगल या यूनिकोड फॉण्ट में टाइप की हुई रचनाएँ केवल ईमेल द्वारा वर्ड फाइल में ही भेजी जा सकती हैं। डाक द्वारा भेजी गई पांडुलिपि पर विचार सम्भव नहीं है। रचना के ऊपर सम्बंधित विधा अवश्य इंगित करें।
4- रचना के साथ लेखक अपना पूरा परिचय भी भेजें जिसमें नाम, पिता व माता का नाम, वर्ष व दिनांक सहित जन्म तिथि, सम्प्रति, पूरा पता, मोबाइल नंबर व ई-मेल का उल्लेख आवश्यक है।
5- प्रत्येक सहयोगी लेखक को सहयोग राशि के तौर पर 700/- देने होंगे।
6- प्रकाशनोपरांत प्रत्येक लेखक को पुस्तक की 5 प्रतियाँ दी जाएँगी |
7- पुस्तक का लोकार्पण लखनऊ में किया जाएगा।
8- पुस्तक का प्रचार-प्रसार इंटरनेट तथा पत्रिकाओं के माध्यम से करवाया जाएगा।
9- रचनाएँ भेजने की अंतिम तिथि 30 मार्च 2017 है।
10- रचना की वर्ड फाइल अपने परिचय और फोटो के साथ निम्न ई-मेल पर भेजें-
lokodayprakashan@gmail.com

संपर्क:-
लोकोदय प्रकाशन
lokoday prakashan@gmail.com

Friday, 27 January 2017

गणतंत्र दिवस के अवसर पर - काव्य निशा सम्पन्न


’’जग से अच्छा देश है मेरा शहर से प्यारा गाँव,
प्रातः चिड़िया चूं चूं करती कौवा काँव-काँव’’
            68वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर उमरिया के समीपी गाँव दुब्बार के निवासी शिवबदन यादव ने अपने गाँव में साहित्यिक संस्था वातायन के सहयोग से काव्य निशा का आयोजन किया। दुब्बार गाँव के कई लोग इस अवसर पर उपस्थित रहे। शम्भू सोनी पागलद्वारा माँ वीणापाणि की स्तुति के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ।

            सर्वप्रथम मेजबान कवि शिवबदन यादव ने स्वागत गीत गाकर सभी अतिथियों का स्वागत किया। हास्य की रचना पढ़ते हुए राम लखन सिंह चौहान ने कुछ इस प्रकार गुदगुदाया जंगल में जन्मदिन सीकट मनाए, वन प्राणी सब आए। उमरिया कालरी में कार्यरत शिवानन्द पटेल ने गणतंत्र पर अपनी बात इस प्रकार कही अमर रहे गणतंत्र हमारा, जब तक चाँद-सितारा। हास्य व्यंग की रचना पढ़ते हुए शेख धीरज ने सुनाया अंध विश्वासों की गोद में जो पलते हैं, कदम-कदम पर वही रास्ता बदलते हैं। मंगठार से पधारे अनन्त उपाध्याय ने सीमा प्रहरियों के बलिदान को नमन करते हुए कहा शहादत रंग लाती है कभी खाली नहीं जाती, अमर बलिदान की बेला कभी टाली नहीं जाती। ग्राम गिंजरी से आए जगदीश पयासी ने अपनी रचना से लोगों को खूब हँसाया ज्याखर लागै छुआतू मौसी ओउ बहनेउता आंय, हमरे घर के दुइठे टोरवा कैंची अउ सरौता आंय। ग्राम परिवेश का सटीक चित्रण करते हुए नगरपालिका कर्मचारी प्रेम शंकर मिर्जापुरी ने एक गीत सुनाया ’’जग से अच्छा देश है मेरा शहर से प्यारा गाँव, प्रातः चिड़िया चूं चूं करती कौवा काँव-काँव’’। मेजवान कवि शिव बदन यादव ने जल संकट के प्रति सचेत करते हुए कहा जल ही जीवन है, जल बिन होई न काम। शिक्षक राज कुमार महोबिया ने एक शानदार गीत सुनाया अगर दुश्मन भी घर आए तो वो मेहमान लगता है, हमें हर एक पत्थर में छुपा भगवान दिखता है। उमरिया कालरी में ही कार्यरत अनिल कुमार मिश्र ने एक आवाहन करते हुए कहा एक दीप मैं लेकर आऊँ तुम भी एक लिए आना, देहरी एक करूँ मैं रोशन तुम भी एक किए आना। उमरिया नगर के वरिष्ठ रचनाकार शम्भू सोनी ने सियासत पर व्यंग करते हुए कहा राजा है शैतान शिकायत किससे करते, मंत्री है बेइमान शिकायत किससे करते। देर रात तक चले शानदार आयोजन का सफल संचालन अनिल कुमार मिश्र ने किया। शिव बदन यादव ने सभी कवियों एवं उपस्थित साहित्य सुधी जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। 

प्रस्तुति- अनिल कुमार मिश्र, उमरिया