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Sunday, 3 January 2016

घोषणा

लोकविमर्श आन्दोलन के तहत 2016 से जनपक्षीय व लोकधर्मी साहित्य को प्रकाशित कर कम मूल्य पर पाठक तक पहुँचाने की सहमति बनी थी । अत: इसी सहमति के तहत लखनऊ में 'लोकोदय' नाम से प्रकाशन का आरम्भ कर दिया गया है । प्रकाशन की सभी आवश्यक वैधानिक कार्यवाहियाँ पूरी हो चुकी हैं । व्यावसायिक फर्म के रूप में रजिस्टर्ड हो चुकी है । बिक्री हेतु विभिन्न शहरों में केन्द्र तय हो चुके हैं । नेट मे बिक्री हेतु बेवसाईट लांच हो चुकी है व कुछ प्रकाशनों के साथ मिलकर छोटे छोटे पुस्तक मेला आयोजित करने की भी बात तय हो चुकी है । लोकोदय का सारा काम श्रीमती नीरज सिंह  को सौंपा गया है । साथियों द्वारा चन्दा करके कोष एकत्र कर लिया गया है । इस कोष से अभी कुछ छ: किताबों का प्रकाशन होगा जिसकी घोषणा वरिष्ठ चित्रकार कुँवर रवींद्र जी करेंगें । लोकोदय के कोष व व्यवस्था हेतु एक संचालन कमेटी है जिसमें आठ सदस्य हैं व किताबों के प्रकाशन की मन्जूरी एवं जाँच के लिए एक सम्पादन कमेटी का गठन किया गया है जिसमें पांच सदस्य हैं । लोकोदय के संविधान की कुछ खास बातें ये हैं -
१- किताब का मूल्य कम रखा जाएगा ताकि सभी खरीद सकें ।
२- केवल पेपर बैक संस्करण ही छपेगा ।
३-लोकविमर्श के साथियों ने रायल्टी न लेने की सहमति दी है इस रायल्टी को कोष में जमा किया जाएगा ।
४- पुरानी लोकधर्मी व वैचारिक किताबें जो आऊट आफ प्रिन्ट हैं उनका पुन: प्रकाशन होगा ।
५- बिक्री इत्यादि से एकत्र कोष द्वारा लोक साहित्य, लोक भाषा  व इतिहास पर किताबों का प्रकाशन होगा ।