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Saturday, 21 February 2026

डॉ. शशि गोयल

 मार्च 1944 को मथुरा में जन्मी डॉ. शशि गोयल हिंदी साहित्य जगत की प्रतिष्ठित एवं बहुआयामी रचनाकार हैं। बचपन से ही पठन-पाठन में गहरी रुचि रही और अल्पायु में ही लेखनी ने आकार लेना शुरू कर दिया। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने एम.ए. (अंग्रेज़ी)एम.ए. (हिंदी) तथा हिंदी में पी-एच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त कीं।

कहानीकवितालेखव्यंग्ययात्रा-वृत्तांत तथा विशेष रूप से बाल साहित्य में आपका उल्लेखनीय योगदान रहा है। अब तक आपकी 55 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। बाल कथाएँबाल गीतबाल उपन्यासकथा-संग्रहकाव्य-संग्रहव्यंग्य-संग्रहसंस्मरण और शोधपरक कृतियों के माध्यम से आपने साहित्य की विविध विधाओं को समृद्ध किया है। आपकी चर्चित कृतियों में बादल की सैरसोने का पेड़श्रेष्ठ बाल कहानियाँभूतवाले पंडित जीबदल गया मनसूरज को भी लगती सर्दीगोलू-भोलू और जंगल का रहस्यमैं अकेलीनेह बंध की देहरीमॉरीशस यात्राकैलाश मानसरोवरइंसान कहीं केधूप प्यारी बच्ची सीछिटके हुए लोग आदि विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

साहित्यिक योगदान के लिए आपको देश की अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है। जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी द्वारा साहित्य मनीषी सम्मानउत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा साहित्य भूषण एवं सुभद्रा कुमारी चौहान महिला बाल साहित्य सम्मानतथा मैं अकेली को पुरस्कृत किया जाना उनकी उपलब्धियों में प्रमुख है। इसके अतिरिक्त अनेक राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थाओं ने समय-समय पर उन्हें सम्मानित किया है।

डॉ. शशि गोयल की रचनाएँ संवेदनशीलतासहज भाषामानवीय मूल्यों और बाल मन की सरलता को अभिव्यक्त करती हैं। वे निरंतर लेखनरत रहकर हिंदी साहित्य की सेवा कर रही हैं।

संपर्क:
ईमेल: Shashigoyal3@gmail.com


Friday, 13 February 2026

डॉ. उमेशचन्द्र सिरसवारी : बाल साहित्य के सृजनशील हस्ताक्षर

 

डॉ. उमेशचन्द्र सिरसवारी समकालीन हिंदी बाल साहित्य के ऐसे सशक्त रचनाकार हैं, जिन्होंने अपनी रचनात्मक प्रतिभा, शोध-दृष्टि और संपादकीय सक्रियता के माध्यम से हिंदी साहित्य, विशेषतः बाल साहित्य को समृद्ध किया है। उनका जन्म 06 मई, 1983 को उत्तर प्रदेश के जनपद सम्भल के गाँव आटा, तहसील चंदौसी में हुआ। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े डॉ. सिरसवारी ने जीवन के प्रारंभिक अनुभवों से संवेदनशीलता, संस्कार और सामाजिक यथार्थ की गहरी समझ अर्जित की, जो आगे चलकर उनके साहित्य का आधार बनी।
  उच्च शिक्षा के प्रति विशेष लगाव रखते हुए उन्होंने एम.ए. हिंदी, एम.ए. संस्कृत तथा बी.एड. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। हिंदी विषय में नेट-जेआरएफ उत्तीर्ण कर उन्होंने अकादमिक क्षेत्र में अपनी मेधा का परिचय दिया और तत्पश्चात अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ से पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उनका यह शैक्षिक वैभव उनके लेखन को गहराई, शोधपरकता और वैचारिक स्पष्टता प्रदान करता है। वे केवल सृजनधर्मी लेखक ही नहीं, बल्कि गंभीर अध्येता और आलोचनात्मक दृष्टि से संपन्न शोधकर्ता भी हैं।
डॉ. सिरसवारी की लेखन विधाएँ अत्यंत व्यापक हैं। वे बालसाहित्य, कहानी, कविता, आलेख, गीत, शोध आलेख तथा समीक्षा सभी विधाओं में समान अधिकार से लेखन करते हैं। किंतु उनकी विशिष्ट पहचान बालसाहित्य के क्षेत्र में एक समर्पित रचनाकार के रूप में स्थापित हुई है। बाल मनोविज्ञान की सूक्ष्म समझ, सरल एवं प्रवाहपूर्ण भाषा, कल्पनाशीलता और नैतिक-सांस्कृतिक मूल्यों का संतुलित समावेश उनकी बाल रचनाओं की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
वर्ष 2021 में प्रकाशित ‘कोरोना काल का सामाजिक सच’ यद्यपि सामाजिक संदर्भों पर आधारित है, परंतु इसमें भी मानवीय संवेदना और सामाजिक चेतना का वह स्वर उपस्थित है, जो बालसाहित्य के लिए आवश्यक मूल्यबोध की पृष्ठभूमि तैयार करता है। वर्ष 2025 में संपादन में प्रकाशित ‘सांस्कृतिक आलोचना के प्रतिष्ठापक आचार्य प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय’ उनके शोधपरक लेखन और आलोचनात्मक दृष्टि का प्रमाण है।
प्रकाशनाधीन कृतियों में ‘जन्मदिन का उपहार’ (बाल कहानी संग्रह) विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इसके अतिरिक्त ‘हिंदी कविता और स्त्री विमर्श’ तथा ‘बालसाहित्य : विविध विमर्श’ जैसी कृतियाँ उनके बहुआयामी चिंतन को रेखांकित करती हैं।
डॉ. सिरसवारी की रचनाएँ देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं- अमर उजाला, दैनिक जागरण, जनसत्ता, पंजाब केसरी, नेशनल दुनिया, हरियाणा प्रदीप, इंदौर समाचार, द ग्रामोदय विजन, हाल-ए-बुंदेलखंड, बाल किरण, नव किरण, हँसती दुनिया, बच्चों का देश, अणुव्रत, बाल भारती, बालहंस आदि में प्रकाशित होती रही हैं। इससे उनकी लेखनी की व्यापक स्वीकार्यता का प्रमाण मिलता है। इसके अतिरिक्त साहित्य पीडिया, जनकृति, साहित्य रागिनी, हस्ताक्षर, रचनाकार, साहित्य कुंज, एवीके न्यूज सर्विस, हिंदी समय आदि पत्रिकाओं तथा वेब प्लेटफॉर्म पर भी उनके बालसाहित्य एवं शोध आलेख निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं। संपादकीय क्षेत्र में भी उनका अनुभव उल्लेखनीय है। साहित्य रागिनी मासिक वेब पत्रिका, शब्द-सरिता त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका, प्रेरणा अंशु मासिक पत्रिका, अद्भुत इंडिया मासिक समाचार पत्र, द ग्रामोदय विजन साप्ताहिक समाचार पत्र, नव किरण त्रैमासिक पत्रिका तथा बाल किरण द्वैमासिक पत्रिका में सह-संपादक एवं कॉलम संचालन का कार्य करते हुए उन्होंने अनेक नवोदित रचनाकारों को मंच प्रदान किया। उनकी साहित्यिक उपलब्धियों को विभिन्न संस्थाओं ने सम्मानित भी किया है। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा वर्ष 2018 का ‘कृष्ण विनायक फड़के बाल साहित्य समीक्षा सम्मान’ उन्हें प्रदान किया गया, जो बालसाहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान की औपचारिक स्वीकृति है। इसके अतिरिक्त भी उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में वे राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत में सहायक संपादक (हिंदी) के पद पर कार्यरत हैं। यह पद उनके साहित्यिक अनुभव, संपादकीय दक्षता और हिंदी के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
समग्रतः डॉ. उमेशचन्द्र सिरसवारी का व्यक्तित्व सृजन, शोध, संपादन और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का संतुलित समन्वय है। उन्होंने बालसाहित्य को केवल मनोरंजन का माध्यम न मानकर उसे मूल्य-निर्माण, संवेदना-विकास और सामाजिक चेतना के संवाहक के रूप में देखा है। उनकी रचनाएँ बाल मन की सहजता को स्पर्श करती हैं और साथ ही उसे नैतिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक रूप से समृद्ध करने का कार्य करती हैं। समकालीन हिंदी बाल साहित्य में उनका योगदान निस्संदेह उल्लेखनीय और प्रेरणादायी है।

संपर्क : ग्रा. आटा, पो. मौलागढ़, तह. चंदौसी, जि. सम्भल (उ.प्र)-244412
मो. : 9410852655

पूजा अग्निहोत्री

 4 सितंबर को छतरपुर (मध्य प्रदेश) में जन्मी पूजा अग्निहोत्री समकालीन हिंदी साहित्य की सक्रिय और बहुआयामी रचनाकार हैं। विज्ञान से इंटरमीडिएट, कला संकाय से स्नातक, अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक तथा पीजीडीसीए की शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात वे स्वतंत्र लेखन एवं पटकथा लेखन से निरंतर जुड़ी हुई हैं।


पूजा अग्निहोत्री की लेखनी कथा, कविता, लघुकथा, नज़्म, समीक्षा और आलोचना—सभी विधाओं में समान अधिकार से संचरित होती है। उनकी कथेतर पुस्तक लोक के राम (2025, स्पर्श प्रकाशन, पटना) उनके वैचारिक और शोधपरक लेखन का प्रमाण है। इसके अतिरिक्त उनकी रचनाएँ देश की अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं—गृहशोभा, लघुकथा कलश, विश्वगाथा, स्रवन्ति, दृष्टि, क्षितिज, पलाश, साहित्य कुञ्ज, पुरवाई आदि—में निरंतर प्रकाशित होती रही हैं।

समाचार-पत्रों जैसे दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, राजस्थान पत्रिका, पंजाब केसरी, दैनिक नवभारत तथा हरिभूमि में उनके साहित्यिक-सामाजिक आलेख, समीक्षाएँ और आलोचनात्मक लेख प्रकाशित होते रहे हैं। उनकी रचनाएँ तेलुगु, उड़िया, कन्नड़ और नेपाली सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनूदित होकर व्यापक पाठक-वर्ग तक पहुँची हैं।

वे ‘काव्य पुंज’, ‘काव्य निहारिका’ और ‘दास्तान-ए-किन्नर’ जैसे साझा संकलनों का हिस्सा रही हैं। यूट्यूब चैनलों (किडलॉजिक्स, बैडटाइम स्टोरी) के लिए पटकथा लेखन के माध्यम से उन्होंने डिजिटल मंच पर भी अपनी सृजनात्मक उपस्थिति दर्ज की है।

उनकी साहित्यिक प्रतिभा को अनेक मंचों पर सम्मानित किया गया है। साहित्य संवेद साहित्यिक संस्था की फणीश्वर रेणु स्मृति क्विज में द्वितीय स्थान, विश्व गाथा साहित्यिक पत्रिका द्वारा सम्मान, ‘नया लेखन, नया दस्तख़त’ लघुकथा प्रतियोगिता में ‘गर्व’ का पुरस्कृत होना, कथा समवेत पत्रिका की अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता-2022 में ‘नई माँ’ को प्रोत्साहन पुरस्कार, तथा हिंदी अकादमी मुंबई द्वारा आयोजित लघुकथा लेखन प्रतियोगिता-2025 में प्रथम स्थान उनके सृजन की स्वीकृति के प्रमाण हैं।

संवेदनशीलता, सामाजिक सरोकार और स्त्री-अनुभूति की गहन अभिव्यक्ति उनकी रचनाशीलता की प्रमुख विशेषताएँ हैं। वे अपने समय और समाज की जटिलताओं को सहज, प्रभावी और मानवीय दृष्टि से अभिव्यक्त करती हैं।

संप्रति:
उर्जानगर ‘C’ ब्लॉक, बिजुरी, अनूपपुर (मध्य प्रदेश) में निवासरत रहकर स्वतंत्र लेखन एवं पटकथा लेखन में सक्रिय।


Thursday, 12 February 2026

सुरेन्द्र प्रजापति

सुरेन्द्र प्रजापति का जन्म 8 अप्रैल 1985 को बिहार के गया ज़िले के ग्राम असनी में हुआ। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े सुरेन्द्र जी की संवेदनशीलता और लेखन की जड़ें मिट्टी, लोकजीवन और आम आदमी के संघर्षों से गहराई से जुड़ी हैं।


मैट्रिक तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने स्वाध्याय के माध्यम से साहित्य से अपना रिश्ता मजबूत किया। साहित्यिक पुस्तकें पढ़ना, कहानियाँ और कविताएँ लिखना तथा गाँव की चहल-पहल और सामाजिक सरोकारों को शब्द देना उनका प्रिय कार्य रहा है।

उनकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं — जैसे ग्रामीण चहल-पहल, समालोचन, पुरवाई, पहलीबार आदि — में प्रकाशित होती रही हैं। उनकी कविताओं में जीवन की सादगी, संघर्ष, उम्मीद और मिट्टी की सोंधी महक साफ झलकती है।

उनका प्रथम कविता संग्रह “उम्मीद की किरणें” वर्ष 2026 में न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन से प्रकाशित हुआ।
“मिट्टी की चीख” उनका नवीन काव्य-संकलन है, जिसमें समाज, संवेदना और मनुष्य की अंतरात्मा की आवाज़ को मार्मिक अभिव्यक्ति मिली है।

संपर्क:
ग्राम–असनी, पोस्ट–बलिया, थाना–गुरारू, जिला–गया, बिहार (824205)
ईमेल: surendraprar01@gmail.com
मो.: 7061821603 / 9006248245

Wednesday, 11 February 2026

अर्चना त्यागी


मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश में जन्मी अर्चना त्यागी साहित्य और शिक्षादोनों क्षेत्रों की सक्रिय, संवेदनशील और बहुआयामी हस्ताक्षर हैं। एम.एससी. (रसायन विज्ञान) एवं एम.एड. शिक्षित अर्चना जी लेखन, पठन-पाठन और रचनात्मक गतिविधियों में विशेष रुचि रखती हैं।

बाल साहित्य, कहानी और लघुकथा लेखन में आपकी विशिष्ट पहचान है। आपकी प्रमुख कृतियों में चीनी का पेड़ (बाल कहानी संग्रह), दीवार के पार (पुरस्कृत कहानी संग्रह), सपने में आना माँ (पुरस्कृत लघुकथा संग्रह), अनवरत, काव्य अमृत, कथा संचय, और मानवता जीत गयी, सरहद पार (कहानी संग्रह, इंक पब्लिकेशन), मुसीबतें पर्वत सही (कविता संग्रह), तीसरा मोड़ (कहानी संग्रह) सहित अनेक साझा एवं एकल संकलन शामिल हैं।

आपकी रचनाएँ राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होती रही हैं। दिल्ली प्रेस की लोकप्रिय पत्रिकाओंगृहशोभा, सरिता, चंपक आदि में भी आपका सतत लेखन प्रकाशित होता रहा है।

आपकी कहानियों का नियमित प्रसारण आकाशवाणी जोधपुर से होता रहा है तथा आकाशवाणी और दूरदर्शन देहरादून से भी रचनाओं का प्रसारण हुआ है। वर्ष 2023 से आप हिंदी लेखक परिवार मंच पर स्वर कलाकार के रूप में सक्रिय हैं।

अनेक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत अर्चना जी को उत्कृष्ट बाल साहित्यकार सम्मान (2024)अणुव्रत विश्व भारती,
वैश्विक साहित्य सम्मान (2024)निर्दलीय प्रकाशन,
सर्वश्रेष्ठ साहित्य सम्मान (2024)नारी अस्मिता पत्रिका (सपने में आना माँ हेतु),
जयपुर साहित्य सम्मान (2025)जयपुर साहित्य संगीति (दीवार के पार हेतु),
राष्ट्र शक्ति शिरोमणि सम्मान (2025)संपर्क क्रांति परिवार,
मारवाड़ गौरव सम्मान (2025)मारवाड़ सिविल सोसाइटी,
अभिनय कला रत्न सम्मान (2025)हिंदुस्तानी भाषा अकादमी एवं हम सब साथ साथप्रोडक्शन,
तथा सुभद्रा कुमारी चौहान सम्मान (2022)गुफ्तगू संस्था सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है।

संप्रति आप सहायक आचार्या पद से स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति के उपरांत स्वतंत्र लेखिका, स्वर कलाकार, मंच संचालक एवं कैरियर परामर्शदाता के रूप में सक्रिय हैं।

Tuesday, 10 February 2026

शिवचरण सिंह चौहान


(जन्म: 26 फ़रवरी 1959, कानपुर)

एम.ए.बी.एड शिक्षित शिवचरण सिंह चौहान एक वरिष्ठ पत्रकारसाहित्यकार एवं जनकवि हैं। दैनिक स्वतंत्र भारतदैनिक जागरण तथा दैनिक अमर उजालाकानपुर में लगभग 28 वर्षों तक समाचार संपादन एवं पत्रकारिता से जुड़े रहे। वर्तमान में स्वतंत्र लेखन एवं पत्रकारिता में सक्रिय हैं।

बाल साहित्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थानबाल कल्याण संस्थाननागरी बाल साहित्य संस्थान सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित। अब तक उनकी चालीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैंजिनमें 16 बाल साहित्य की पुस्तकें विशेष रूप से चर्चित हैं।

दो हजार से अधिक रचनाएँ धर्मयुगनवनीतकादंबिनीआजकलगगनांचलबालभारतीनंदनपरागसाहित्य अमृत आदि प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। समाज में जनकवि के रूप में लोकप्रिय।

कलासंस्कृतिसाहित्यसंगीत तथा पर्यावरण चेतना और लोक साहित्य के प्रचार-प्रसार के प्रति समर्पित।

📍 कानपुर देहातउत्तर प्रदेश
✉️ shivcharany2k@gmail.com