Friday, 13 February 2026

डॉ. उमेशचन्द्र सिरसवारी : बाल साहित्य के सृजनशील हस्ताक्षर

 

डॉ. उमेशचन्द्र सिरसवारी समकालीन हिंदी बाल साहित्य के ऐसे सशक्त रचनाकार हैं, जिन्होंने अपनी रचनात्मक प्रतिभा, शोध-दृष्टि और संपादकीय सक्रियता के माध्यम से हिंदी साहित्य, विशेषतः बाल साहित्य को समृद्ध किया है। उनका जन्म 06 मई, 1983 को उत्तर प्रदेश के जनपद सम्भल के गाँव आटा, तहसील चंदौसी में हुआ। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े डॉ. सिरसवारी ने जीवन के प्रारंभिक अनुभवों से संवेदनशीलता, संस्कार और सामाजिक यथार्थ की गहरी समझ अर्जित की, जो आगे चलकर उनके साहित्य का आधार बनी।
  उच्च शिक्षा के प्रति विशेष लगाव रखते हुए उन्होंने एम.ए. हिंदी, एम.ए. संस्कृत तथा बी.एड. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। हिंदी विषय में नेट-जेआरएफ उत्तीर्ण कर उन्होंने अकादमिक क्षेत्र में अपनी मेधा का परिचय दिया और तत्पश्चात अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ से पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उनका यह शैक्षिक वैभव उनके लेखन को गहराई, शोधपरकता और वैचारिक स्पष्टता प्रदान करता है। वे केवल सृजनधर्मी लेखक ही नहीं, बल्कि गंभीर अध्येता और आलोचनात्मक दृष्टि से संपन्न शोधकर्ता भी हैं।
डॉ. सिरसवारी की लेखन विधाएँ अत्यंत व्यापक हैं। वे बालसाहित्य, कहानी, कविता, आलेख, गीत, शोध आलेख तथा समीक्षा सभी विधाओं में समान अधिकार से लेखन करते हैं। किंतु उनकी विशिष्ट पहचान बालसाहित्य के क्षेत्र में एक समर्पित रचनाकार के रूप में स्थापित हुई है। बाल मनोविज्ञान की सूक्ष्म समझ, सरल एवं प्रवाहपूर्ण भाषा, कल्पनाशीलता और नैतिक-सांस्कृतिक मूल्यों का संतुलित समावेश उनकी बाल रचनाओं की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
वर्ष 2021 में प्रकाशित ‘कोरोना काल का सामाजिक सच’ यद्यपि सामाजिक संदर्भों पर आधारित है, परंतु इसमें भी मानवीय संवेदना और सामाजिक चेतना का वह स्वर उपस्थित है, जो बालसाहित्य के लिए आवश्यक मूल्यबोध की पृष्ठभूमि तैयार करता है। वर्ष 2025 में संपादन में प्रकाशित ‘सांस्कृतिक आलोचना के प्रतिष्ठापक आचार्य प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय’ उनके शोधपरक लेखन और आलोचनात्मक दृष्टि का प्रमाण है।
प्रकाशनाधीन कृतियों में ‘जन्मदिन का उपहार’ (बाल कहानी संग्रह) विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इसके अतिरिक्त ‘हिंदी कविता और स्त्री विमर्श’ तथा ‘बालसाहित्य : विविध विमर्श’ जैसी कृतियाँ उनके बहुआयामी चिंतन को रेखांकित करती हैं।
डॉ. सिरसवारी की रचनाएँ देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं- अमर उजाला, दैनिक जागरण, जनसत्ता, पंजाब केसरी, नेशनल दुनिया, हरियाणा प्रदीप, इंदौर समाचार, द ग्रामोदय विजन, हाल-ए-बुंदेलखंड, बाल किरण, नव किरण, हँसती दुनिया, बच्चों का देश, अणुव्रत, बाल भारती, बालहंस आदि में प्रकाशित होती रही हैं। इससे उनकी लेखनी की व्यापक स्वीकार्यता का प्रमाण मिलता है। इसके अतिरिक्त साहित्य पीडिया, जनकृति, साहित्य रागिनी, हस्ताक्षर, रचनाकार, साहित्य कुंज, एवीके न्यूज सर्विस, हिंदी समय आदि पत्रिकाओं तथा वेब प्लेटफॉर्म पर भी उनके बालसाहित्य एवं शोध आलेख निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं। संपादकीय क्षेत्र में भी उनका अनुभव उल्लेखनीय है। साहित्य रागिनी मासिक वेब पत्रिका, शब्द-सरिता त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका, प्रेरणा अंशु मासिक पत्रिका, अद्भुत इंडिया मासिक समाचार पत्र, द ग्रामोदय विजन साप्ताहिक समाचार पत्र, नव किरण त्रैमासिक पत्रिका तथा बाल किरण द्वैमासिक पत्रिका में सह-संपादक एवं कॉलम संचालन का कार्य करते हुए उन्होंने अनेक नवोदित रचनाकारों को मंच प्रदान किया। उनकी साहित्यिक उपलब्धियों को विभिन्न संस्थाओं ने सम्मानित भी किया है। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा वर्ष 2018 का ‘कृष्ण विनायक फड़के बाल साहित्य समीक्षा सम्मान’ उन्हें प्रदान किया गया, जो बालसाहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान की औपचारिक स्वीकृति है। इसके अतिरिक्त भी उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में वे राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत में सहायक संपादक (हिंदी) के पद पर कार्यरत हैं। यह पद उनके साहित्यिक अनुभव, संपादकीय दक्षता और हिंदी के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
समग्रतः डॉ. उमेशचन्द्र सिरसवारी का व्यक्तित्व सृजन, शोध, संपादन और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का संतुलित समन्वय है। उन्होंने बालसाहित्य को केवल मनोरंजन का माध्यम न मानकर उसे मूल्य-निर्माण, संवेदना-विकास और सामाजिक चेतना के संवाहक के रूप में देखा है। उनकी रचनाएँ बाल मन की सहजता को स्पर्श करती हैं और साथ ही उसे नैतिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक रूप से समृद्ध करने का कार्य करती हैं। समकालीन हिंदी बाल साहित्य में उनका योगदान निस्संदेह उल्लेखनीय और प्रेरणादायी है।

संपर्क : ग्रा. आटा, पो. मौलागढ़, तह. चंदौसी, जि. सम्भल (उ.प्र)-244412
मो. : 9410852655

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