सुशील कुमार सक्सेना (साहित्यिक नाम: सुशील सरित) हिन्दी
साहित्य जगत के एक बहुआयामी, सशक्त और अत्यन्त सक्रिय
रचनाकार हैं। विगत लगभग पाँच दशकों से वे साहित्य, मंच और
प्रसारण माध्यमों से निरन्तर जुड़े हुए हैं।
अब तक उनकी 3500 से अधिक रचनाएँ— जिनमें
कविता, कहानी, नाटक, व्यंग्य आदि विविध विधाएँ शामिल हैं— देश की
प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। साहित्य के क्षेत्र में उनका
योगदान अत्यन्त व्यापक है, जिसका प्रमाण उनकी 78 प्रकाशित
पुस्तकें हैं।
आकाशवाणी के हिन्दी भाषी केंद्रों से उनके 88 नाटक प्रसारित हो
चुके हैं,
जो सॉफ्टवेयर आर्काइव में स्थायी रूप से सुरक्षित हैं। उनकी
रचनात्मकता का वैश्विक प्रभाव भी उल्लेखनीय है— यूके,
जापान और भारत के विभिन्न पाठ्यक्रमों में उनकी 61 रचनाएँ शामिल की
जा चुकी हैं।
सम्मानों की दृष्टि से भी वे अत्यन्त समृद्ध हैं। उन्हें उत्तर
प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा तीन बार सम्मानित किया गया है, जिनमें वर्ष 2022 का प्रतिष्ठित साहित्य भूषण सम्मान (₹2,50,000) विशेष
उल्लेखनीय है। इसके अतिरिक्त उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चार
दर्जन से अधिक पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।
उनकी रचनात्मक उपस्थिति केवल साहित्य तक सीमित नहीं है— वे एक सफल उद्घोषक, कवि, लेखक
और गायक के रूप में भी विख्यात हैं। वे पिछले 32 वर्षों से अंतर्राष्ट्रीय ताज
महोत्सव के स्थायी मुख्य उद्घोषक रहे हैं। साथ ही, उनकी
रचनात्मक प्रतिभा फिल्म जगत तक भी पहुँची है, जहाँ फीचर
फिल्म ‘जीवन चक्र’ में उनके चार गीत शामिल हैं।
मंचीय गतिविधियों में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान है— उनके एक दर्जन से अधिक नाटक एवं नृत्य-नाटिकाएँ मंचित हो चुकी हैं।
व्यवसायिक रूप से वे पूर्व में प्रवक्ता एवं बैंक कर्मी रहे हैं
और वर्तमान में स्वतंत्र रूप से साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
ईमेल: sushilsaxenasarit@gmail.com

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