Sunday, 21 December 2025

आँख भर आकाश

 

“आज जीवन कठिन से कठिनतर होता जा रहा हैजीते रहने के लिए लगातार संघर्षरत रहना मजबूरी हैपूँजीवादी श्रम-विभाजन के इस माहौल में जीवन से रागात्मकता और काव्यबोध लुप्त होते जा रहे हैं, जीवन में कविता का स्पेस सिकुड़ता चला जा रहा है। ऐसे में आधुनिक जीवन की जटिलता को कविता के वितान में बाँधना आज की आवश्यकता है।“

 

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