Friday, 17 April 2026

ताजी ठण्डी हवा सी मोहक चक्रधारी राधा

लघुकथा विधा में वर्तमान समय स्वप्नवत और गतिमान प्रकार का है। अपनी ऊर्जा के साथ न्याय करने के स्थान पर उसे मात्रात्मक परिणामों पर केन्द्रित करने का चलन न केवल बढ़ रहा है, स्वीकार्य भी हो चला है। एक विधा के साथ जीते हुए मात्र उसके कलेवर, शैली और शास्त्रोक्त प्रकार के सांचे में ढ़ली रचनाओं को लगातार परोसते रहना ही नहीं वरन उसके पोषण को लेकर जागरुक रहना भी प्रत्येक लेखक का कर्तव्य बन जाता है। डॉ. नीना छिब्बर लघुकथा विधा की स्थापित हस्ताक्षर हैं और अपने अनुशासित लेखन, विषय वैविध्य और किसी सोच विशेष के ठप्पे से परे के सृजन हेतु जानी जाती हैं। 

प्रस्तुत संग्रह अपने इंद्रधनुषी अस्तित्व और समाधानपरक सोच के चलते भीड़ में अलग स्थान रखता है। कोरे कल्पना विलास से परे वास्तविक तथ्यों की पड़ताल करते विषय और सीधी सरल भाषा पाठकों को बांधने में सक्षम है। लीक से हटकर विषय जो प्रकृति की हरियाली से लेकर जीवन में स्थायित्व के दोराहे पर उलझाती परिस्थितियों को साथ लिये चलते हैं, उनका जन्म लेखिका की अनुभवी रचना कोख से हुआ है। पुस्तक की शीर्षक लघुकथा नावीन्य का पुट लिये हुए है।

माॅं का द्वंद्व जैसी लघुकथाऍं असमंजस के दोराहे पर लाकर खड़ा कर देती हैं ।वहीं आत्मकथात्मक शैली की लघुकथा एक जागरण का संदेश देती प्रतीत होती है। नशामुक्ति, स्व कारावास जैसे वर्तमान में अछूते विषय एक आशा जगाते हैं। पर्यावरण पर आपकी चिंता अनेक रचनाओं में से परिलक्षित होती है। सिरदर्दी जैसी लघुकथा नवीन तकनीक और अकेलेपन के बीच की उहापोह को बेहतर व्यक्त करती है। कुछ लघुकथाऍं भविष्य की यात्रा पर भी ले जाती हैं।
कृषि और युवाओं को जोड़ती, नैतिक मूल्यों से सजी लघुकथाऍं हमें समय की तत्कालीन नकारात्मकता से परे एक उजास का मार्ग दिखाती हैं। बाल मनोभावों पर लेखिका की अच्छी पकड़ है। बारीक संवेदनाएं, नन्हे सुख और छोटी सी इस खुशनुमा दुनिया में इनकी कई रचनाओं के द्वारा यात्रा करना सुखद लगता है।
इन रचनाओं में कहीं -कहीं कल्पना पक्ष भारी पड़ता है और लेखिका के भावों के अनुरुप पाठकीय दृष्टि तैयार करने में थोड़ा समय भी लगता है। इन रचनाओं में विषय ताज़े हैं, कुछ तो आवश्यक हैं और कुछ सांकेतिक भी हैं। कुछ स्थानों पर रचनाओं में कथा तत्व पर और भी काम किया जाना संभव था जहाॅं पर वे विचार से थोड़ा आगे जा सकते थे।
प्रत्येक लेखक की कहन कुछ रचनाओं की रियाज़ के बाद ही साकार हो पाती है। यही तत्व नीना छिब्बर जी की रचनाओं पर लागू होता है। उनका जीवन को, जग को और फलसफों को देखने का एक अलहदा अंदाज़ है जो उन्हें वर्तमान लघुकथा लेखकों से अलग करता है। नवीन विषय को उठाने और उसपर प्रयोग करने में वे अधिक सोच विचार नही करती। प्रस्तुत संग्रह में कोई भी विषय ऎसा नही है जिसे घिसा पिटा या घर- घर की कहानी के समान कहा जा सके।
नैतिक मूल्य यदि हैं भी तो उनकी वास्तव में समाज को आवश्यकता है और वे उपदेशों की चाशनी से परे सत्य के नमकीन घोल में डूबे हुए हैं। अपनी लेखनी से स्वयं को रेखांकित करने का भाव लेखिका में नही मिलता जो कि दुर्लभ है और यही उन्हें एक स्तर आगे ले जाता है, जहाॅं पर वे अपने विचार, लेखनी और सर्जना से समाज को एक बेहतरी का उपहार देने के लिये तत्पर है। अलग विषय और षडरस के आनंद से परिपूर्ण इस संग्रह का स्वागत है। लेखिका की उर्वर मनोभूमि से आगे सर्जना की सुनहरी फसल आती रहे, शुभकामनाएं और बधाई!
                                                                                                             अंतरा करवड़े
                                                                                                             अनुध्वनि
                                                                                                             117, श्रीनगर एक्स्टेंशन
                                                                                                             इंदौर 452018
                                                                                                             म.प्र.

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