हिन्दी एवं राजस्थानी साहित्य जगत की एक संवेदनशील और सशक्त सृजनधर्मी हस्ताक्षर हैं, जिनकी लेखनी मानवीय अंतर्मन की गहराइयों से उद्भूत भावों को अत्यन्त सहज, मार्मिक और प्रभावपूर्ण अभिव्यक्ति प्रदान करती है। वे अनुभूतियों के सूक्ष्मतम स्पर्श को शब्दों में ढालने की अद्भुत क्षमता रखती हैं। एम.ए. (हिन्दी एवं इतिहास) से शिक्षित ‘मनी’ जी ने गद्य और पद्य दोनों विधाओं में अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली परिचय दिया है।
इनकी रचनाओं में जीवन के विविध रंग—प्रेम, विरह, स्मृति, संघर्ष, आशा और लोकजीवन की सहज सुगंध—गहन संवेदना और सरस भाषा के साथ अभिव्यक्त होते हैं। पाठक जब इनकी कृतियों
से गुजरता है, तो वह केवल शब्द नहीं पढ़ता, बल्कि भावों की एक जीवन्त यात्रा का अनुभव करता है।
प्रस्तुत कृति “अंतर्मन” उनके भावलोक की उसी अंतर्यात्रा का सजीव दस्तावेज है, जिसमें मन की अनकही व्यथाएँ, स्मृतियों की कोमल
छवियाँ, प्रेम की सरस अनुभूतियाँ और जीवन के सूक्ष्म सत्य एक
साथ स्पंदित होते हैं। उनकी रचनाएँ पाठक को केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने, ठहरने और स्वयं से संवाद करने के
लिए आमंत्रित करती हैं।
इनकी प्रमुख प्रकाशित कृतियों में ‘यादें’ (हिन्दी काव्य संग्रह) और ‘हियै री हथाई’ (राजस्थानी कहानी संग्रह) विशेष रूप
से उल्लेखनीय हैं। इसके अतिरिक्त 100 से अधिक साझा संकलनों, अनेक
प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर
आपकी रचनाएँ निरन्तर प्रकाशित होती रही हैं, जो आपके व्यापक
साहित्यिक योगदान का प्रमाण हैं।
आपको विद्योत्तमा साहित्य साथी सम्मान (नासिक), वीणापाणि काव्य सम्मान, ‘काव्य कुसुम’ मानद उपाधि, मधुशाला काव्य भूषण सम्मान,साहित्य सृजक सम्मान, लोक साहित्य रत्न सम्मान,
सुभद्रा कुमारी चौहान सम्मान (उत्तर प्रदेश) सहित अनेक प्रतिष्ठित
सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
‘मनी’ जी की लेखनी केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि संवेदनाओं का एक सजीव संसार है—जो पाठक के
अंतर्मन को स्पर्श कर उसे आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है।
सम्पर्क :
निवास: जोधपुर (राजस्थान)
ई-मेल: manjujangid165@gmail.com
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